Thursday, April 14, 2011

शोर !

शोर
हुआ था बहुत
कान
फटने लगे थे
मातम का है
या चाहे
जैसा भी सन्नाटा है
रहने दो
कुछ घड़ी इसे तुम
रहने दो !!

1 comment:

एम सिंह said...

शोर से तो सन्नाटा भला

मेरा ब्लॉग भी देखें
भले को भला कहना भी पाप