Saturday, April 16, 2011

खामोशी !!

कब तक मैं खामोश बैठता
कई घंटों से बैठा था
सोच रहा था, क्या ना जाने
क्या धुन थी खामोशी की !

बैठे बैठे सोच रहा था
डूबा था खामोशी में
क्यों और कैसा, था सन्नाटा
क्या धुन थी खामोशी की !

कब से मैं खामोश रहा था
और कब तक खामोशी थी
ये मुझको भी खबर नहीं थी
क्या धुन थी खामोशी की !

कुछ घंटों से देख रहा था
सदियों सी सरसराहट थी
कुछ बैचेनी, कुछ हलचल थी
क्या धुन थी, खामोशी की !!

1 comment:

एम सिंह said...

बेहतरीन khamoshi
मेरे ब्लॉग पर आयें, आपका स्वागत है
बचें ऑनलाइन जॉब्स की धोखाधड़ी से