Wednesday, February 9, 2011

कर्म !

मैं
निर्माण करूंगा
भाग्य का

मेरे विचार
कर्म का रूप लेंगे
कर्म का प्रत्येक अंश
मेरे भाग्य की आधारशिला होगी

हर पल
मेरे विचार - मेरे कर्म
ही मेरे भाग्य बनेंगे
और मैं ................. ।

सत्य-अहिंसा !

सत्य-अहिंसा के पथ पर
आगे बढने से डरता हूं
कठिन मार्ग है मंजिल तक
रुक जाने से डरता हूं

हिंसा रूपी इस मंजर में
कदम पटक कर चलता हूं
कदमों की आहट से
हिंसा को डराते चलता हूं

झूठों की इस बस्ती में
फ़ंस जाने से डरता हूं
'सत्य' न झूठा पड जाये
इसलिये "कलम" दिखाते चलता हूं

सत्य-अहिंसा के पथ पर
आगे बढने ......................।

छोटी सी ज्वाला !

एक समय था जल रही थी
ऊंच-नीच की 'छोटी सी ज्वाला'
कुछ लोगों ने आकर उस पर
जात-पात का तेल छिडक डाला

भभक-भभक कर भभक उठी
वह 'छोटी सी ज्वाला'
फ़िर क्या था कुछ लोगों ने
उसको अपना हथियार बना डाला

न हो पाई मंद-मंद
वह 'छोटी सी ज्वाला'
अब गांव-गांव, शहर-शहर
हर दिल - हर आंगन में
दहक रही है 'छोटी सी ज्वाला' ।